डिजिटल सेवाओं के साथ बढ़ी साइबर सुरक्षा की जरूरत
स्मार्टफोन और इंटरनेट ने बैंकिंग, खरीदारी तथा पैसों के लेनदेन को आसान बनाया है। अब लोग घर बैठे बिल भर सकते हैं, पैसे भेज सकते हैं और कई सरकारी सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन डिजिटल सुविधाओं के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम भी बना रहता है। साइबर अपराधी लोगों को फर्जी संदेश, नकली वेबसाइट, फोन कॉल और भ्रामक लिंक के माध्यम से निशाना बना सकते हैं। अक्टूबर 2026 में डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया ने साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान Be Cyber Street Smart शुरू किया। इस अभियान में AI आधारित धोखाधड़ी, डीपफेक और आवाज की नकल करके की जाने वाली ठगी जैसे नए जोखिमों पर भी ध्यान दिया गया। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा की बुनियादी जानकारी हर इंटरनेट उपयोगकर्ता के लिए महत्वपूर्ण हो गई है।
1. OTP और बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें
- ऑनलाइन ठगी का एक सामान्य तरीका लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल करना है।
- किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, ATM PIN या इंटरनेट बैंकिंग का पासवर्ड न बताएं। बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी यदि फोन पर ऐसी जानकारी मांगता है, तो सतर्क रहें।
- यदि किसी भुगतान को स्वीकार करने के लिए PIN डालने को कहा जा रहा है, तो पहले स्क्रीन पर दिखाई जा रही जानकारी ध्यान से पढ़ें।
2. अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें
- कई बार लोगों को संदेश मिलता है कि उनका बैंक खाता बंद होने वाला है, पार्सल रोक दिया गया है या किसी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए तत्काल लिंक खोलना जरूरी है।
- ऐसे संदेशों में दिए गए लिंक नकली वेबसाइट पर ले जा सकते हैं।
- किसी भी वेबसाइट पर बैंकिंग जानकारी भरने से पहले उसका आधिकारिक पता जांचें। बेहतर है कि संबंधित संस्था की वेबसाइट या ऐप स्वयं खोलें, न कि अनजान संदेश के लिंक से प्रवेश करें।
3. फर्जी ग्राहक सेवा नंबर से सावधान रहें
- लोग अक्सर इंटरनेट पर बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी या अन्य सेवाओं के ग्राहक सहायता नंबर खोजते हैं।
- साइबर अपराधी कभी-कभी नकली वेबसाइट या पोस्ट के जरिए गलत नंबर प्रसारित करते हैं। ऐसे नंबर पर संपर्क करने से व्यक्ति अपनी निजी जानकारी साझा कर सकता है या धोखाधड़ी का शिकार बन सकता है।
- ग्राहक सहायता के लिए संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप में दिए गए संपर्क माध्यम का उपयोग करना अधिक सुरक्षित है।
4. AI और आवाज की नकल वाली ठगी को समझें
- AI तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज या वीडियो जैसी दिखने वाली नकली सामग्री तैयार की जा सकती है।
- ऐसे में किसी परिचित की आवाज में आया संदेश भी बिना पुष्टि के सही नहीं मानना चाहिए।
- यदि कोई व्यक्ति फोन पर खुद को रिश्तेदार बताकर तत्काल पैसे मांगता है, तो उसके पुराने नंबर पर वापस कॉल करके पुष्टि करें। जरूरत पड़ने पर परिवार के दूसरे सदस्य से भी संपर्क करें।
5. UPI भुगतान करते समय ध्यान रखें
- डिजिटल भुगतान करते समय प्राप्तकर्ता का नाम, राशि और भुगतान का उद्देश्य जांचना चाहिए।
- QR कोड स्कैन करने का अर्थ हमेशा पैसे प्राप्त करना नहीं होता। कई परिस्थितियों में QR कोड का इस्तेमाल भुगतान करने के लिए होता है।
- इसी तरह, अनजान व्यक्ति के निर्देश पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप या रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल न करें। इससे आपके डिवाइस और निजी जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम पैदा हो सकता है।
- 6. मजबूत पासवर्ड और दो-स्तरीय सुरक्षा अपनाएं
- एक ही पासवर्ड का उपयोग कई खातों में करना जोखिम बढ़ा सकता है।
- ईमेल, बैंकिंग और सोशल मीडिया खातों के लिए अलग-अलग मजबूत पासवर्ड रखें। जहां उपलब्ध हो, दो-स्तरीय प्रमाणीकरण का इस्तेमाल करें।
- फोन और ऐप को समय-समय पर अपडेट करना भी उपयोगी है, क्योंकि अपडेट में सुरक्षा से संबंधित सुधार शामिल हो सकते हैं।
7. ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें
- यदि आपके खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाएं, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और उपलब्ध आधिकारिक साइबर अपराध शिकायत माध्यमों का उपयोग करें।
- भारत में साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन 1930 उपलब्ध हैं। शिकायत के समय ट्रांजैक्शन आईडी, संदेश, फोन नंबर और अन्य संबंधित प्रमाण सुरक्षित रखें।
- शिकायत दर्ज करने में देरी न करना महत्वपूर्ण है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

